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रंग भेद से पश्चिमी देश, लिंग भेद से मध्य एशियाई देश और जातीय भेद से पूर्वी देश पीड़ित- इंद्रेश कुमार
September 11, 2020 • A.K.SINGH
किन्नरों का उपहास उड़ाने वालों को दिया समरसता का संदेश
    वाराणसी। रंग भेद से पश्चिमी देश, लिंग भेद से मध्य एशियाई मुस्लिम देश और जातीय भेद से पूर्वी देश पीड़ित है। भेदभाव की वजह से विश्व में कुछ वंचित समूहों को न सुविधा मिल पा रही है और न ही सम्मान।  विशाल भारत संस्थान एवं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संयुक्त तत्वावधान में आज इन्द्रेश नगर (लमही) के सुभाष भवन में रिश्तों का सम्मान एवं राखी से वैश्विक समरसता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि समाज सुधारक एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इन्द्रेश कुमार ने दीप जलाकर  कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। 
   विशाल भारत संस्थान ने वंचित समूहों के कुछ प्रतिनिधियों को बुलाकर रिश्तों से जोड़ने की शुरूआत की। किन्नर समाज, बांसफोर समाज, तलाक पीड़ित मुस्लिम महिलायें और नट समाज की महिलाओं को आमंत्रित किया, ताकि उनको स्वाभिमान और सम्मान का एहसास हो सके।
    इन्द्रेश कुमार ने सभी समाज की महिलाओं से राखी बंधवाकर पूरे विश्व को इंसानियत, मानवता, समरसता और बराबरी का संदेश काशी से दिया। इन्द्रेश कुमार ने पश्चिमी देशों की प्रगतिशीलता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा किया व कहा कि जो देश सबसे अधिक मानवाधिकार की बात करते हैं वो गोरे-काले के रंग भेद से जूझ रहे हैं। जो मुस्लिम देश अपने धर्म की वकालत समानता के आधार पर करते हैं वो देश लिंग भेद से जूझ रहे हैं और आजतक मस्जिदों में महिलाओं को नमाज पढ़ने का अधिकार नहीं दिला पाये।
 किन्नर समाज और तलाक पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को समाज में स्थान दिलाकर मुख्यधारा से जोड़ने का अभियान विशाल भारत संस्थान अनवरत् चला रहा है। धर्म स्थलों पर सबको समान अधिकार मिले, पूजा करने और कराने का अधिकार सबको प्राप्त हो, यह सबकी जिम्मेदारी है। यह तभी सम्भव है जब व्यवहारिक स्तर पर कार्य हो। इन्द्रेश कुमार ने दीप जलाते समय भी किन्नर गुरू निशा  और तलाक पीड़ित मुस्लिम महिला सोनी बेगम को साथ लिया। 
   यह पूरी दुनियां के लिये संदेश है कि भारतीय संस्कृति प्राणी मात्र में भी भेद नहीं करती।
 इन्द्रेश कुमार ने सिर्फ राखी नहीं बधवाई, उन लोगों में भी रिश्तों का एहसास करा दिया जिन लोगों के रिश्तेदारों ने उन्हें कभी सम्मान नहीं दिया।
 इस अवसर पर इन्द्रेश कुमार ने कहा कि विश्व के सभी नेताओं को समाज सुधारकों के साथ मिलकर इंसानियत को कलंकित करने वाले सभी तरह के भेद को, छूआछूत को खत्म करने के लिये कदम बढ़ाने चाहिये। विश्व के विकसित देश केवल आर्थिक समृद्धि को विकास का मॉडल न बनावें, बल्कि समाज में व्याप्त सामाजिक एवं धार्मिक कुरीतियों को खत्म करने की योजना बनायें। इसी से इंसान के साथ मानवता जिंदा रहेगी। भारत रिश्तों का देश है, यहां प्रत्येक व्यक्ति रिश्तों से जुड़ा है, इसलिये भारत में मानवीय मूल्य सभी देशों से सबसे ऊपर है। यहां के धर्म ग्रन्थ विश्व बन्धुत्व और ब्रह्माण्ड की शांति का पाठ पढ़ाते है, इसलिये सनातन धर्म और संस्कृति किसी से भी भेद करने की इजाजत नहीं देती। जो लोग जाति, रंग, लिंग के नाम पर भेद करते हैं वे ईश्वर की इच्छा के विरूद्ध कार्य करते हैं। पूरे विश्व को भगवान राम के चरित्र का अध्ययन करना चाहिये और अपने देशों में रामायण पर शोध कराना चाहिये।
    किन्नर समाज के लोग उपहास के नहीं सम्मान के पात्र हैं। उनको भी शादी, ब्याह, जन्मदिन, धार्मिक, सामाजिक, राजनैतिक कार्यक्रमों में आमंत्रित कर सम्मान देना चाहिये। सम्मान देने की परम्परा की शुरूआत सुभाष भवन काशी से हो चुकी है और यही संदेश पूरी दुनियां को भेदभाव से मुक्त करेगा।
 किन्नर गुरू निशा  ने कहा कि हमें सुविधा की नहीं सम्मान की जरूरत है। राखी के रिश्ते से जो सम्मान हमें मिला है उसे हम कभी भूला नहीं सकते हैं। समाज और सरकार हमारे किन्नर समाज पर भरोसा करके देखे। हम भी देश के लिये बड़े से बड़ा काम कर सकते हैं। इन्द्रेश कुमार एवं डा० राजीव श्रीवास्तव ने किन्नरों के इतिहास में सम्मान का सुनहरा पन्ना जोड़ दिया है।
 विशाल भारत संस्थान के अध्यक्ष डा० राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि पश्चिमी देशों और अरब से नफरत के स्तर तक भेदभाव की संस्कृति विकसित हुयी। आज नफरत की वजह से कई देश हिंसा से झुलस रहे हैं। भेदभाव रहित समाज बनाने के लिये दुनियां के सभी देशों को आगे आना होगा। 
   असली विकास तभी सम्भव है जब हम मानवीय संवेदना, मानवीय मूल्य और इंसानियत का विकास करें। किन्नर समाज को राजनीति और नौकरी में भी बराबरी का अधिकार मिलना चाहिये।
 कार्यक्रम में धर्म संस्कृति संगम के उत्तर प्रदेश संयोजक अरुण सिंह, प्रो० एस०पी० सिंह, डा० नीरज श्रीवास्तव, अर्चना भारतवंशी, नजमा परवीन, नाजनीन अंसारी, डा० मृदुला जायसवाल, इरफान अहमद शम्सी, मो० अजहरूद्दीन, अब्दुल मजीद, सुनील कुमार, जाफरीन बानों, मेहर फातिमा, नरगिस, सोनी, रशीदा बेगम, हाजरा बेगम, नगीना, नाजिया, तबस्सुम, जमीला, किन्नर समाज की निशा किन्नर, ललिता किन्नर, सोनी किन्नर, मुस्कान किन्नर, नगीना किन्नर आदि लोगों ने भाग लिया।