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जानिए कैसे होता है राज्यसभा उपसभापति का चुनाव, पक्ष-विपक्ष ने किसे बनाया है उम्मीदवार?
September 14, 2020 • A.K.SINGH

राज्यसभा का उपसभापति एक संवैधानिक पद है. कोई भी राज्यसभा सांसद इस पद के लिए अपने किसी साथी सांसद के नाम का प्रस्ताव आगे बढ़ा सकता है.

उपसभापति का पद इस्तीफा देने पर, पद से हटाए जाने पर या इस पद पर आसीन राज्यसभा सांसद का कार्यकाल खत्म होने के बाद खाली हो जाता है.

राज्यसभा (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन आज राज्यसभा में उपसभापति पद के लिए चुनाव होना है. इस चुनाव के लिए एनडीए की ओर से जेडीयू के हरिवंश नारायण सिंह और विपक्ष की ओर से आरजेडी के मनोज झा उम्मीदवार हैं. ये चुनाव दोपहर तीन बजे शुरू होगा. वहीं, नतीजे भी आज ही घोषित हो जाएंगे. हालांकि राज्यसभा का आंकड़ा साफ तौर पर एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में है.

    सबसे पहले राज्यसभा को जानें

    बता दें कि देश में संसद के दो सदन हैं, एक लोकसभा और दूसरा राज्यसभा. लोकसभा के सदस्यों को जनता मतदान करके चुनती है, जबकि राज्यसभा के सदस्यों को राज्यों के चुने गए विधायक निर्वाचित करते हैं. राज्यसभा की अध्यक्षता देश के उपराष्ट्रपति करते हैं. अभी वैंकेय्या नायडू उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के अध्यक्ष हैं. अध्यक्ष ही सभापति होते हैं और एक उपसभापति भी होते हैं, जिसे राज्यसभा के सदस्य मिलकर चुनते हैं. अध्यक्ष के ना होने पर उपासभापति राज्यसभा का कार्यभार संभालते हैं.

कैसे होता है उपसभापति का चुनाव?

  राज्यसभा का उपसभापति एक संवैधानिक पद है. कोई भी राज्यसभा सांसद इस पद के लिए अपने किसी साथी सांसद के नाम का प्रस्ताव आगे बढ़ा सकता है. हालांकि इस प्रस्ताव पर किसी दूसरे सांसद का समर्थन भी आवश्यक है. इसके अलावा प्रस्ताव को आगे बढ़ाने वाले सदस्य को सांसद द्वारा हस्ताक्षरित एक घोषणा प्रस्तुत करनी होती है, जिनका नाम वह प्रस्तावित कर रहा है. इसमें यह भी उल्लिखित रहता है कि निवार्चित होने पर वह उपसभापति के रूप में सेवा करने के लिए तैयार हैं. यदि सभी राजनीतिक दलों में किसी एक सांसद के नाम को लेकर आम सहमति बन जाती है, तो ऐसे हालात में सांसद को सर्वसम्मति से राज्यसभा का उपसभापति चुन लिया जाता है. राज्यसभा उपसभापति पद के लिए यह 20वीं बार चुनाव हो रहा.

   किस स्थिति में खाली होता है ये पद?

   उपसभापति का पद इस्तीफा देने पर, पद से हटाए जाने पर या इस पद पर आसीन राज्यसभा सांसद का कार्यकाल खत्म होने के बाद खाली हो जाता है. उपसभापति हरिवंश नारायण का कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो गया था, जिसके चलते उप सभापति पद के लिए चुनाव हो रहा है. हालांकि इस पद के लिए वह इस बार भी चुनावी मैदान में हैं.

किसके पक्ष में हैं आंकड़े?

   अगर आंकड़ों की बात करें तो जेडीयू के उम्मीदवार हरिवंश की जीत तय मानी जा सकती है. राज्यसभा में फिलहाल सदस्यों की कुल संख्या 240 है. अगर चुनाव वाले दिन सभी सदस्य वोट करते हैं तो जीतने के लिए 121 मतों की जरूरत पड़ेगी. बीजेपी के 87 सदस्यों समेत एनडीए के पास 105 सांसदों का समर्थन हासिल है.

   वर्तमान हालात को देखते हुए वाईएसआर कांग्रेस के 6, एआईएडीएमके के 9 और बीजू जनता दल के भी 9 सदस्यों के भी एनडीए के ही समर्थन में वोट करने की संभावना है. ऐसे में हरिवंश के पास 129 सदस्यों का समर्थन हासिल है. वही मनोज झा के पास कांग्रेस के 40 सांसदों समेत केवल 99 सांसदों का समर्थन हासिल है. बीएसपी , टीडीपी और टीआरएस का रुख अभी साफ़ नहीं है. इन पार्टियों के कुल 12 सदस्य हैं.