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दुखद था कश्मीरी पंडितों का पलायन,नेहरू की मर्जी से हुआ था जम्मू-कश्मीर के एक हिस्से पर पाकिस्तान का कब्जा
January 21, 2020 • A.K.SINGH

राज्य ब्यूरो, जम्मू। यह कहना गलत है कि टू-नेशन थ्योरी वीर सावरकर या जिन्ना की मर्जी थी। ऐसा कुछ नहीं था। यह अंग्रेजों की थ्योरी थी, जिसने भारत को बांटा। अगर अंग्रेज भारत को नहीं बांटते तो आज दुनिया की सबसे बड़ी ताकत होता। इसका असर अफगानिस्तान, ईरान और रूस पर होता। यह बात पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के संरक्षक और पूर्व उपमुख्यमंत्री मुजफ्फर हुसैन बेग ने कही।

उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर के एक हिस्से पर पाकिस्तान का कब्जा पं. जवाहर लाल नेहरू की मर्जी से हुआ है। जम्मू-कश्मीर का एक हिस्सा उधर चला गया और एक इस तरफ रह गया। पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि जहां तक कश्मीर मसले के हल की बात है कि इसके लिए सबसे पहले पाकिस्तान यहां बंदूकवालों को भेजना बंद करे और ईमानदारी से हिंदुस्तान से बातचीत की प्रक्रिया शुरू करे।

दुखद था कश्मीरी पंडितों का पलायन

बेग ने कहा कि कश्मीरी पंडितों का पलायन अत्यंत दुखद है। वे जब यहां से निकले तो घरों के दरवाजे खुले थे। मंदिरों पर आज भी ताला है, उनकी स्थिति ठीक नहीं है। कश्मीर का इस्लाम तो सूफीवादी है, बहावी इस्लाम नहीं था, लेकिन सन 1990 में सबकुछ बदल गया। हम चाहते हैं कि यह लोग वापस आएं। जब मैं मंत्री था तो मैंने प्रयास किया था और मेरा यकीन है कि कश्मीरी पंडित, भारत सरकार, जम्मू के डोगरा और कश्मीर के मुस्लिमों व यहां के प्रशासन को मिलकर प्रयास करना होगा तभी कश्मीरी पंडित घाटी लौट सकेंगे।

विवादास्पद मुद्दे पर तीसरा पक्ष नहीं

कश्मीर में विदेशी राजनायिकों के दौरे और कश्मीर मसले के समाधान संबंधी सवाल के जवाब में बेग ने कहा कि कुछ समय पूर्व कुछ विदेशी राजनियकों ने मुझसे इस मुद्दे पर बातचीत की थी। मैंने उन्हें कहा था कि शिमला समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद ही पाकिस्तान ने अपने बंदी सैनिकों को भारत से छुड़वाया था। समझौते में सभी विवादास्पद मुद्दों पर तीसरे पक्ष को नकारा गया है।