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दिल्ली दंगे में सीताराम येचुरी, योगेंद्र यादव और जयति घोष आरोपी नहीं- दिल्ली पुलिस
September 14, 2020 • A.K.SINGH

दिल्ली दंगों के मामले में दिल्ली पुलिस ने शनिवार को उन मीडिया रिपोर्ट्स को ख़ारिज किया है, जिनमें बताया गया था कि सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी, स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव, अर्थशास्त्री जयती घोष, डीयू के प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद और डॉक्युमेंट्री फ़िल्ममेकर राहुल रॉय के नाम दिल्ली दंगों की पूरक चार्जशीट में सह-साज़िशकर्ता के तौर पर हैं।

नई दिल्ली: देश की राजधानी में इस साल फरवरी में हुए दंगों के मामले में दिल्ली पुलिस ने शनिवार को उन मीडिया रिपोर्ट्स को ख़ारिज किया है, जिनमें बताया गया था कि सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी, स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव, अर्थशास्त्री जयती घोष, डीयू के प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद और डॉक्युमेंट्री फ़िल्ममेकर राहुल रॉय के नाम दिल्ली दंगों की पूरक चार्जशीट में सह-साज़िशकर्ता के तौर पर हैं।

       बता दें कि शनिवार शाम समाचार एजेंसी पीटीआई के एक ट्वीट को लेकर बवाल मच गया था और तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया आने लगी थी, जिसमें बताया गया था कि इनके नाम सह-साज़िशकर्ता के तौर पर पूरक आरोपपत्र में हैं। इसके क़रीब 2 घंटे बाद पीटीआई ने एक और ट्वीट किया, जिसमें दिल्ली पुलिस का हवाला देते हुए बताया कि इन सबका नाम एक अभियुक्त के बयान में लिया गया है और इस बयान के आधार पर किसी के ख़िलाफ़ मुक़दमा नहीं चलाया जा सकता यानी आरोपपत्र में इनका नाम किसी अभियुक्त के तौर पर नहीं है।

     सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने भी चार्जशीट में सह-साज़िशकर्ता के तौर पर नामज़द होने का खंडन किया था। उन्होंने ट्वीट कर लिखा था, "यह रिपोर्ट तथ्यात्मक रूप से ग़लत है और उम्मीद है कि पीटीआई इसे वापस ले लेगा। पूरक चार्जशीट में मुझे सह-षड्यंत्रकारी या अभियुक्त के रूप में उल्लेख नहीं किया गया है। पुलिस की अपुष्ट बयान में एक अभियुक्त के बयान के आधार पर मेरे और येचुरी के बारे में उल्लेख किया गया है जो अदालत में स्वीकार्य नहीं होगा।"

       मामले में नाम आने के बाद येचुरी ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था, "दिल्ली पुलिस भाजपा की केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के नीचे काम करती है। उसकी ये गैर-कानूनी हरकतें भाजपा के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के चरित्र को दर्शाती हैं। वे विपक्ष के सवालों और शांतिपूर्ण प्रदर्शन से डरते हैं और सत्ता का दुरुपयोग कर हमें रोकना चाहते हैं।"

सीएए समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों के बाद 24 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें कम से कम 53 लोग मारे गए और लगभग 200 लोग घायल हो गए थे।