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धँस गया काँटा करौंदे का जो अभी बस पाँव में ...गोलोक विहारी राय की सम-सामयिक कविता का आनन्द ले
April 15, 2020 • A.K.SINGH

धँस गया काँटा करौंदे का
जो अभी बस पाँव में 

जो पक गए हैं फल
गूलर, बेर के भी , केर के ..
मद भरा महुआ टपकता
है हवा को टेर के ...

ओ मंजरी महकी है बागों की 
जो गमकती छाँव में...

आम बौराए, झरी है
नीम मेरे गाँव में..
फूटता सेमल लिपटता
राह चलते पाँव में...

पीले पड़े पीपल - पात
झड़कर, हरे फिर हो गए 
सिन्दूरी पाकड़ के टूँसे
संवाद तन में छोड़ गए

गोलोक विहारी राय

महामंत्री

( राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच )